Vinod Upadhyay Encounter: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने शुक्रवार को एक मुठभेड़ को अंजाम दिया, जिसमें गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुख्यात गैंगस्टर विनोद उपाध्याय का खात्मा हो गया। करीब 7 महीने से एसटीएफ की टीम विनोद उपाध्याय की तलाश में थी. जब उन्होंने उसे सुल्तानपुर में उसके स्थान पर ट्रैक किया, तो उसने भागने की कोशिश में गोलियां चला दीं. जवाब में, यूपीएसटीएफ ने जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद उसकी मौत हो गई. विनोद उपाध्याय न सिर्फ माफिया सरगना और शार्पशूटर था बल्कि उसने चुनाव भी लड़ा था.
योगी ने जैसे ही बंदूक उठाई, गैंगस्टर के एनकाउंटर की खबर आई, Mafia को UP STF ने किया ढे़र
Vinod Upadhyay Encounter: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने शुक्रवार को एक मुठभेड़ को अंजाम दिया
ADVERTISEMENT
Crime Tak
09 Jan 2024 (अपडेटेड: Jan 9 2024 4:05 PM)
2007 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा
ADVERTISEMENT
2005 में अपनी पहली हत्या के बाद विनोद उपाध्याय ने तेजी से राजनीति में कदम रखा और महज दो साल के अंदर ही बसपा से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी. 2007 में बसपा ने विनोद उपाध्याय को गोरखपुर का प्रभारी नियुक्त किया. उसी वर्ष बाद में, बसपा ने उन्हें विधानसभा चुनाव में सहजनवा निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा, जिसमें वह हार गया.
उनके खिलाफ 35 से ज्यादा मामले दर्ज हैं
विनोद उपाध्याय पर उत्तर प्रदेश में 35 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे. पिछले सात महीने से गोरखपुर क्राइम ब्रांच और एसटीएफ उसकी तलाश में थी. उसकी आपराधिक यात्रा 2004 में एक हत्या से शुरू हुई; जघन्य अपराध का उसका पहला कृत्य मात्र एक थप्पड़ के प्रतिशोध में था. वह अयोध्या के रहने वाले थे.
2005 में पहली हत्या
प्रारंभिक हत्या 2005 में संत कबीर नगर बखिरा के पास हुई, जहां विनोद उपाध्याय ने जीत नारायण मिश्रा को निशाना बनाया, उसने पहले 2004 में गोरखपुर जेल में उन पर हमला किया था. जब जीत नारायण मिश्रा को अगले वर्ष रिहा किया गया, तो विनोद उपाध्याय ने मौके का फायदा उठाया और उनकी हत्या कर दी.
शार्पशूटर और माफिया सरगना
विनोद कुमार उपाध्याय ने अपना संगठित ग्रुप बनाकर गोरखपुर, बस्ती, संत कबीर नगर और लखनऊ में कई सनसनीखेज हत्याएं की थीं. एसटीएफ मुख्यालय से डिप्टी एसपी दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में एसटीएफ ने उसके खिलाफ मुठभेड़ को अंजाम दिया. उपाध्याय यूपी पुलिस की सूची में शीर्ष 10 वांछित अपराधियों में से एक था.
ADVERTISEMENT